सोशल मीडिया मार्केटिंग: एजेंसी रखने से पहले खाते, फ़ीस, इन्फ़्लुएंसर के ASCI नियम और DPDP नियम समझें
भारत के कारोबारियों के लिए हिंदी में: एजेंसी का काम, खातों की मालिकी, ASCI के खुलासे के लेबल, DPDP नियम 2025 और गूगल विज्ञापन की बुनियादी बातें
Published by AI Knows Us · Updated 22 October 2026
सोशल मीडिया मार्केटिंग का मतलब है Instagram, Facebook, YouTube, LinkedIn जैसे प्लैटफ़ॉर्म पर अपने कारोबार के लिए पोस्ट, वीडियो और विज्ञापन चलाना, ताकि सही लोग आपको जानें और आपसे संपर्क करें। अगर आप इसके लिए डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी रख रहे हैं, तो सबसे पहले तीन बातें तय करें: सारे पेज और विज्ञापन खाते आपकी कंपनी के नाम पर हों, एजेंसी की फ़ीस विज्ञापन के खर्च से अलग लिखी हो, और हर महीने की रिपोर्ट में लीड या बिक्री की संख्या हो, सिर्फ़ लाइक और फ़ॉलोअर नहीं। साथ ही, भारत में पैसे देकर करवाई गई हर इन्फ़्लुएंसर पोस्ट पर साफ़ लेबल लगाना ज़रूरी है। ASCI के दिशानिर्देश कहते हैं कि यह खुलासा "upfront and prominent" होना चाहिए।
इस पेज पर दिए गए नियम हमने 22 अक्टूबर 2026 को सीधे मूल स्रोतों से पढ़े: ASCI की कोड और दिशानिर्देश वाली किताब, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) का DPDP नियमों पर दस्तावेज़, और Google की हिंदी सहायता पेज। हमारी वेबसाइट ज़्यादातर अंग्रेज़ी में है; यह लेख भारत के उन कारोबारियों के लिए हिंदी में लिखा गया है जो सोशल मीडिया मार्केटिंग या ऑनलाइन मार्केटिंग के लिए एजेंसी ढूंढ रहे हैं।
एक सोशल मीडिया मार्केटिंग एजेंसी असल में क्या करती है
अलग-अलग एजेंसियों के पैकेज अलग होते हैं, लेकिन काम आम तौर पर इन हिस्सों में बंटा होता है। कोटेशन लेते समय हर हिस्से के बारे में अलग से पूछें कि वह पैकेज में शामिल है या नहीं।
- रणनीति: आपके ग्राहक कौन हैं, वे किस प्लैटफ़ॉर्म पर हैं, और आपको उनसे क्या करवाना है, जैसे कॉल, WhatsApp मैसेज, फ़ॉर्म भरना या खरीदारी।
- कंटेंट बनाना: फ़ोटो, रील, वीडियो, कैप्शन और ग्राफ़िक। यहीं सबसे ज़्यादा मेहनत और खर्च लगता है।
- पेज संभालना: तय कैलेंडर से पोस्ट करना, कमेंट और मैसेज का जवाब देना।
- पेड विज्ञापन: टारगेटिंग, बजट, विज्ञापन के कई रूप आज़माना और खराब चल रहे विज्ञापन बंद करना।
- इन्फ़्लुएंसर काम: क्रिएटर चुनना, ब्रीफ़ देना और यह देखना कि खुलासे के नियम माने जा रहे हैं।
- रिपोर्टिंग: खर्च, पहुंच, क्लिक, लीड और हर लीड की लागत।
एक अच्छी एजेंसी पहले पूछेगी कि आपका कारोबार किस बात में अलग है और ग्राहक आज आपको कैसे ढूंढते हैं। जो एजेंसी बिना यह समझे सीधे "महीने की 20 पोस्ट" का पैकेज भेज दे, वह काम की गिनती बेच रही है, नतीजे नहीं। पैकेज को पढ़ने का पूरा तरीका हमने अंग्रेज़ी में भारत में सोशल मीडिया मार्केटिंग पैकेज कैसे पढ़ें लेख में बताया है।
खाते आपके नाम पर हों, एजेंसी के नाम पर नहीं
एजेंसी बदलते समय सबसे ज़्यादा परेशानी इसी बात से होती है। कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तख़त करने से पहले लिखित में तय करें:
- Facebook और Instagram के पेज, विज्ञापन खाता, YouTube चैनल और Google विज्ञापन खाता आपकी कंपनी के नाम पर बने हों, और सबसे ऊंचा एडमिन अधिकार आपके पास रहे। एजेंसी को सिर्फ़ उतना अधिकार दें जितना काम के लिए चाहिए।
- विज्ञापन का भुगतान आपके कार्ड या खाते से हो, या एजेंसी के ज़रिए हो तो हर महीने असली विज्ञापन खर्च का ब्योरा मिले।
- एजेंसी ने जो फ़ोटो, वीडियो और डिज़ाइन बनाए, उनके इस्तेमाल का अधिकार आपके पास रहे।
- कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने पर सारे खाते, कंटेंट और डेटा आपके पास बने रहें।
इन्फ़्लुएंसर मार्केटिंग: ASCI के नियम
भारत में इन्फ़्लुएंसर विज्ञापन के नियम विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने मई 2021 में जारी किए। ASCI की कोड और दिशानिर्देश वाली किताब के मुताबिक, किसी इन्फ़्लुएंसर के खाते पर छपे हर विज्ञापन पर ऐसा लेबल होना चाहिए जिससे साफ़ पता चले कि यह विज्ञापन है। मुख्य बातें ये हैं:
- अगर विज्ञापनदाता और इन्फ़्लुएंसर के बीच कोई "material connection" है, तो खुलासा ज़रूरी है। यह संबंध सिर्फ़ पैसे का नहीं होता; मुफ़्त या छूट वाला सामान, गिफ़्ट, ट्रिप या होटल में ठहरना भी इसमें आता है।
- मंज़ूर किए गए लेबल हैं: Advertisement, Ad, Sponsored, Collaboration, Partnership, Employee, Free Gift, Affiliate, या प्लैटफ़ॉर्म का अपना खुलासा टूल।
- खुलासा सिर्फ़ प्रोफ़ाइल या bio में, पोस्ट या वीडियो के आखिर में, या "MORE" दबाने के बाद दिखे, तो उसके छूट जाने की संभावना है। उसे हैशटैग या लिंक के ढेर में भी नहीं छिपाना चाहिए।
- 15 सेकंड या उससे छोटे वीडियो में लेबल कम से कम 3 सेकंड दिखे; 15 सेकंड से 2 मिनट तक के वीडियो में वीडियो की लंबाई के एक-तिहाई समय तक; और 2 मिनट या ज़्यादा के वीडियो में उस पूरे हिस्से में जहां ब्रांड की बात हो रही है।
- वर्चुअल इन्फ़्लुएंसर को अलग से यह भी बताना होगा कि दर्शक किसी असली इंसान से बात नहीं कर रहे।
ज़िम्मेदारी सिर्फ़ इन्फ़्लुएंसर की नहीं है। ASCI के दिशानिर्देश कहते हैं कि विज्ञापनदाता को यह सुनिश्चित करना है कि पोस्ट ASCI कोड के मुताबिक हो, और ज़रूरत पड़े तो वह इन्फ़्लुएंसर से पोस्ट हटाने या लेबल ठीक करने को कहे। स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं के इन्फ़्लुएंसर के लिए 6 मार्च 2025 का अतिरिक्त नियम है कि वे अपनी योग्यता और पंजीकरण की जानकारी पोस्ट में शुरू में ही बताएं।
AI से बनी तस्वीरें और वीडियो
ASCI की किताब में अब "synthetically generated content" यानी AI से बनाए गए विज्ञापन कंटेंट के लिए भी दिशानिर्देश हैं। AI से किसी असली व्यक्ति का झूठा प्रशंसापत्र बनाना, नतीजों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना या किसी की शक्ल बिना अनुमति के इस्तेमाल करना मना है, चाहे उस पर AI का लेबल लगा हो या नहीं। AI से बने इन्फ़्लुएंसर या ब्रांड एंबेसडर इस्तेमाल करने पर लेबल लगाना अनिवार्य है।
ग्राहकों का डेटा: DPDP नियम 2025
सोशल मीडिया से आई लीड, WhatsApp नंबर और ईमेल सूची निजी डेटा हैं। PIB के दस्तावेज़ के मुताबिक, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियम 2025 को 14 नवंबर 2025 को अधिसूचित किया गया, और इनके पालन के लिए अठारह महीने की चरणबद्ध अवधि दी गई है। दस्तावेज़ के अनुसार:
- हर डेटा फ़िड्यूशरी को एक अलग, साफ़ और आसानी से समझ आने वाला सहमति नोटिस देना होगा, जिसमें बताया जाए कि डेटा किस खास मकसद से लिया और इस्तेमाल किया जा रहा है।
- डेटा लीक होने पर प्रभावित लोगों को बिना देर किए सरल भाषा में बताना होगा कि क्या हुआ, उसका क्या असर हो सकता है और क्या कदम उठाए गए।
- उचित सुरक्षा उपाय न रखने पर अधिनियम के तहत 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
अगर एजेंसी आपके लिए लीड फ़ॉर्म चलाती है या ग्राहकों की सूची विज्ञापन प्लैटफ़ॉर्म पर अपलोड करती है, तो उससे पूछें कि सहमति कैसे ली जा रही है और डेटा कहां रखा जा रहा है।
ऑनलाइन मार्केटिंग में गूगल विज्ञापन की जगह
सोशल मीडिया पर लोग स्क्रॉल करते हुए आपको देखते हैं, जबकि Google पर वे खुद कुछ ढूंढ रहे होते हैं। StatCounter के सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 96.69 प्रतिशत सर्च Google पर हुईं। इसलिए कई कारोबार सोशल मीडिया के साथ गूगल विज्ञापन भी चलाते हैं। दो बातें ध्यान रखें:
- Google की हिंदी सहायता पेज के अनुसार, किसी खास दिन आपका कैंपेन रोज़ के औसत बजट से दोगुना खर्च कर सकता है, लेकिन महीने के आखिर में खर्च रोज़ के औसत बजट के 30.4 गुना से ज़्यादा नहीं होगा।
- Google के अनुसार, "Google के ज़रिए विज्ञापन दिखाने से, इस बात पर कोई असर नहीं पड़ता कि आपकी साइट हमारे खोज के नतीजों में किस तरह दिखती है।" विज्ञापन से ऑर्गैनिक रैंकिंग नहीं बढ़ती।
- Google Ads की टैक्स वाली सहायता पेज (अंग्रेज़ी) के मुताबिक, Google Asia Pacific से सेवा लेने पर सभी खरीद पर 18 प्रतिशत GST लगता है, जब तक आप वैध GSTIN न दें।
फ़ीस कैसे तय होती है और कोटेशन की तुलना कैसे करें
हम इस पेज पर फ़ीस की कोई रेंज नहीं दे रहे, क्योंकि हमें कोई ऐसा भरोसेमंद सार्वजनिक स्रोत नहीं मिला जिसे जांचा जा सके। फ़ीस के आम तरीके ये हैं: हर महीने की तय फ़ीस, विज्ञापन खर्च का कुछ प्रतिशत, हर रील या वीडियो के हिसाब से प्रोडक्शन का पैसा, और नतीजों के हिसाब से भुगतान। सभी एजेंसियों को एक ही ब्रीफ़ भेजें: आपका कारोबार, शहर, हर महीने का अधिकतम बजट, और आप किसे नतीजा मानेंगे। फिर हर कोटेशन में देखें कि कितनी पोस्ट और वीडियो बनेंगे, कौन बनाएगा, विज्ञापन खर्च अलग है या नहीं, GST जुड़ा है या नहीं, और कॉन्ट्रैक्ट कितने समय का है।
सोशल मीडिया मार्केटिंग से जुड़े सवाल
क्या फ़ॉलोअर बढ़ना ही सफलता है?
नहीं। फ़ॉलोअर तभी काम के हैं जब उनमें से कुछ ग्राहक बनें। रिपोर्ट में लीड, कॉल, WhatsApp मैसेज या बिक्री की संख्या और हर लीड की लागत मांगें।
क्या हर इन्फ़्लुएंसर पोस्ट पर #ad लगाना ज़रूरी है?
अगर ब्रांड और इन्फ़्लुएंसर के बीच कोई material connection है, जैसे पैसा, मुफ़्त सामान या गिफ़्ट, तो ASCI के अनुसार खुलासा ज़रूरी है। ASCI ने Ad, Advertisement, Sponsored, Collaboration जैसे लेबल की सूची दी है, और लेबल शुरू में और साफ़ दिखना चाहिए।
हिंदी में कंटेंट बनाएं या अंग्रेज़ी में?
यह आपके ग्राहकों पर निर्भर करता है। अगर आपके ग्राहक हिंदी में बात करते और खोजते हैं, तो उसी भाषा में पोस्ट और विज्ञापन बनाएं। ASCI के दिशानिर्देशों के अनुसार खुलासा इस तरह होना चाहिए कि औसत उपभोक्ता उसे अच्छी तरह समझ सके।
सोशल मीडिया मार्केटिंग का असर कब परखें?
काम शुरू करने से पहले तय किए गए आंकड़ों से परखें: लीड, कॉल, बिक्री और हर लीड की लागत। नतीजे आपके कारोबार में मुकाबले, आपके ऑफ़र और बजट पर निर्भर करते हैं, इसलिए हर कारोबार के लिए एक जैसी समय सीमा नहीं होती।
जब ग्राहक AI से पूछता है
आजकल कई लोग Instagram या Google खोलने के बजाय ChatGPT या Gemini से पूछते हैं, जैसे "लखनऊ में शादी के लिए अच्छा फ़ोटोग्राफ़र कौन है?" जवाब में कुछ ही नाम आते हैं, और उनके पीछे के स्रोत सोशल मीडिया पोस्ट से अलग हो सकते हैं।
AI के जवाब में आपका नाम आता है या नहीं, यह जांचना सोशल मीडिया मार्केटिंग से अलग किस्म की सेवा है। AI Knows Us इसी तरह की सेवा है: यह आपके ग्राहकों जैसे सवाल ChatGPT, Gemini, Perplexity, Claude और Google AI Overviews से पूछती है, और दिखाती है कि किसका नाम सुझाया गया और जवाब किन स्रोतों पर आधारित था। हमारी वेबसाइट और रिपोर्ट अंग्रेज़ी में हैं।